Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan – क्या आप नवादा के मोगलाकर के शमशुल खैर मस्जिद के बारे में जानना चाहते हैं तो आप एक बेहतरीन पोस्ट को पढ़ रहे हैं इस पूरे शमशुल खैर मस्जिद है उसके बारे में सारी जानकारी आपको मिल जाएगी इस और इसमें किस तरीके के लोग यहां पर शामिल है जो इसे चला रहे हैं इसका इतना जल्दी ग्रुप पाया है कि इस मस्जिद के अंदर कितनी नमाज पढ़ने के लिए आते हैं और कितने सारे घर है जो इसे लगा रखे और मैं यह भी बताऊंगा कि इस मस्जिद के का मतलब मानने वाले लोग किस टाइप के हैं सुनाई है देवबंदी है या अहिल्यादीस है और इसके बाद मैं बताऊंगा कि आपको आपसी तरसे है तो फिर मस्जिद के बारे में पूरी जानकारी हासिल हो जाएगी | Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
मस्जिद की बुनियादी स्थापना
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शुरुआत में नवाब बड़ी मस्जिद होने के बावजूद मोहल्ले की बढ़ती आबादी को देखते हुए नई मस्जिद की ज़रूरत महसूस हुई।
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इसके बाद मुगलाकर के दरिया मोहल्ला और डीडीएस मोहल्ला के लोगों ने मिलकर इस मस्जिद की नींव रखी।
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शुरू-शुरू में मस्जिद की हालत बहुत साधारण थी – लोग चटाई बिछाकर नमाज़ अदा करते थे।
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धीरे-धीरे लोगों की मदद, चंदा और मेहनत से मस्जिद का विकास होता गया।Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
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जैसा मशहूर शेर है –
“मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,
लोग आते गए और कारवां बनता गया।”
iske bunyadi dhancha –चलिए बात करते हैं मुगल आकर के शमशुल खैर मस्जिद के बारे में किसकी बुनियादी एस्टेब्लिश कैसे हुई थी तो जहां तक बड़ी मस्जिद तो और आबादी चली गई तो लोगों को ऐसा महसूस हुआ कि हमें एक नई मस्जिद की ताबीर करनी चाहिए तो नवाब बड़ी मस्जिद है उसके बाद यही मदद की स्थापना की गई है तो जो मुगल आकार में आपको दरिया मोहल्ला एक है डीडीएस मोहल्ला की स्थापना की गई थी तो पूरे मुगल घर के अवाम लोगों ने इस मस्जिद की तामीर में हिस्सा लिया और इसमें जो भी लोग शामिल थे माशाल्लाह उन्होंने बेल्ट किया बहुत अच्छे इमदाद किया जहां तक होता है लोगों ने इसमें अपना पूरा बहुत मुश्किल से मैं खुद देखा है कि ऐसी हालत थी मस्जिद की की लोग नीचे में चटाई बिछा करके नमाज पढ़ा करते थे शुरू-शुरू में फिर धीरे-धीरे इसका डेवलपमेंट हुआ है तो फिर लोगों ने शामिल हुआ इसमें शामिल होते गए और कि मैं तो चला था अकेले मंजिल ने मगर लेकिन लोग आते गए कारवां बनता गया बस उसी तरीके से इस मस्जिद के का डेवलपमेंट हुआ | Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
मस्जिद का विकास (Development Journey)
iske sanchalak – अब बात करते इसके संचालक के की इसके चलने वाले कौन है तो जहां तक मुझे याद है कि इसके चलने वाले लोगों तमाशा सभी ने अपना अपना जहां तक हो पाया बहुत बेहतर इन से मिलती है तो जैसा लोगों को रिचार्ज लगा किसी ने किसी के टाइम में वांछित का विकास हुआ मस्जिद की तरक्की हुई किसी के लोकगीत कितने सारे लोग उसको चलाएं तो अभी के अभी से देखा था कई बार मस्जिद के जो है जो 5 से 10 साल में दे रहा हूं पिछले 15 साल से की इस मस्जिद को चल तो इससे पहले जो अभी चल रहे हैं उसका नाम है मोहम्मद सुहैल खान ।और हमें बात करने खुशी करेंगे पिछले कौन लोग चलाया कितनी कि लोगों ने की आज उसकी विकास की उसका नाम क्या था ना उसके बारे में कुछ चुगली करना चाहता हूं या उसके बारे में कोई डिमोटिवेशन या कोई विकार की बातें करने चाहता हूं कि उन लोगों ने मस्जिद को किस तरह चलाया जाना चाहता हूं |
की मस्जिद क्योंकि अभी के लोगों ने मस्जिद को किस तरह से चला रहे हो अभी के समय की बात करूंगा तो मोहम्मद चला है जब से स्थापना मस्जिद के लिए तब से लेकर जब से अभी इस एरिया में देखा जाए तो बहुत अच्छे तरीके से इसमें विकास हो चुका है और लोगों में एक लाख मोहब्बत की बने हुए हैं इसे इमदाद बहुत अच्छे तरीके से इमदाद कर रहे हैं जहां तक हो पाया पैसे का डिमांड कर रहे हैं और हमने कभी सोचा नहीं था कि इस मस्जिद में जहां पर लोग बालों पर चटक लाइट लग गए और इसी लगे हुए मस्जिद में तो अल्हम्दुलिल्लाह बहुत अच्छी बात है जो है लोग रहते हैं और मस्जिद में हमेशा रोज नमाज पढ़ने जाते हैं या कोई दुश्मनी हो तो आप बहुत ही दिल खुश होकर बहुत ही अच्छे मिजाज में बहुत ही शौक से मस्जिद को बनाए थे लोगों ने अल्हम्दुलिल्लाह | Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
मस्जिद के संचालक
मस्जिद के विकास और संचालन में कई लोगों ने अपनी अहम भूमिका निभाई है।
| क्रमांक | नाम | कार्यकाल/भूमिका |
|---|---|---|
| 1 | पहले के स्थानीय लोग | मस्जिद की स्थापना और प्रारंभिक संचालन |
| 2 | मोहम्मद सुहैल खान | वर्तमान संचालक, मस्जिद के विकास में अहम योगदान |
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वर्तमान में मोहम्मद सुहैल खान साहब मस्जिद का संचालन कर रहे हैं।
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उन्होंने मस्जिद की तरक्की और मोहल्ले के लोगों को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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चंदा और इमदाद को पारदर्शिता से उपयोग किया जाता है।
मस्जिद के इमाम साहब
yehan k imam sahab – अब बात किया कि किसी मस्जिद की जो इमाम साहब है जो चलाते हैं तो देखिए हमको जहां तक याद है कि मैं इतना साल से 15 साल के आसपास हो गया मेरा रहते हुए और मैं देख कर आ रहा हूं की मस्जिद बनी थी तो उसे समय कोई अस्थाई इमाम साहब नहीं थे वह किसी मदरसे के थे वह आते थे नमाज पढ़ने के लिए चले जाते थे मतलब अस्थाई परमैन एंट लेकिन जब इसका विकास हुआ डेवलपमेंट हुआ लोगों में इंटरेस्ट बाद लोग चंदा देने लगे लोग इसमें सहायता देने लगे पैसे के बौछार होने लगी और लोग इमदाद कर तो प्रीति है उन्होंने सोचा कि ईमान से जो यहां पर है और मदरसे में बच्चों की तालीम मिले और इसके साथ-साथ जो है |Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
ना वह पांच टाइम तो टाइम मतलब नमाज पढ़ाई ताकि किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो और अल्हम्दुलिल्लाह अभी इस समय जो है मस्जिद के जो इमाम साहब है हजरत रियाज अहमद साहब यह जो है इससे मस्जिद के मोहर्रम भी है और इसकी जो है इमाम साहब जी हैं इसके अलावा और भी है मौलाना मनीष साहब है इसके अलावा और मौजूद शायद है और एक दो और इमाम साहब देश में काम कर रहे हैं लड़के लोग हैं मतलब मदरसे में हाफिज है करी है जो मदरसे को चला रहे हैं मस्जिद को चला रहे हैं तो इसी मस्जिद के अंदर एक मदरसे भी आते हैं उसको चलाते हैं तो छुट्टी कभी होती है तो कोई दिक्कत नहीं कभी दिक्कत नहीं होता पहले दिक्कत होती थी अगर इमाम साहब कहीं चले गए तो नमाज पढ़ने के लिए भी दिक्कत होती थी क्योंकि यह मोहल्ला ऐसा था जहां पर अनपढ़ लोगों की संख्या ज्यादा थी और अभी अल्हम्दुलिल्लाह कुछ पढ़े लिखे लोगों की संख्या बढ़ने लगी है तो जब संख्या बढ़ने लगी और अल्हम्दुलिल्लाह माशाल्लाह बहुत अच्छी बात है कि लोग यहां पर आ रहे हैं|Shamshul Khair Masjid Nawada ki Shaan
शमशुल खैर मस्जिद की खास बातें
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पाँचों वक्त की नमाज़ का सुचारू रूप से आयोजन।
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मस्जिद से जुड़ा मदरसा जहाँ बच्चों की तालीम होती है।
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मोहल्ले के लोगों का आपसी सहयोग और मोहब्बत।
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आधुनिक रोशनी और सुविधाओं से सजी हुई मस्जिद।
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मोहल्ले की इबादत और एकता की पहचान।
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